उसको सच पसंद ना आया यह कैसा जमाना था

  मैंने अपनी गलती को माना था.
 उसको सच पसंद ना आया ये कैसा जमाना था...... 

 वो किसी और के हो जाएं हमें मंजूर है
 झूठ के साथ रिश्ता हमें ना नामंजूर हैं

 अभी जाकर यह उसको एक सच और बताना था.
 कितनी झूठी तेरी हंसी कितना झूठा तेरा फसाना था
उसको सच पसंद ना आया यह कैसा जमाना था........ 
 
प्यार का मतलब अगर शरीर से होता
 रूह के अंदर खुदा भी ना होता.
 भूल जाऊंगा तेरे हर चेहरे के नूर की याद को
 हम नहीं कोई और इस पर बर्बाद हो... 

 हम तो फरिश्ते हैं शैतान को भी दुआ देते हैं
 तेरे झूठे प्यार को हम भुला देते हैं
 लेकिन तुझको याद दिलाना था
 सच मेरा पसंद ना आया यह कैसा जमाना था.. 

 




  

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